सागर से भी गहरा बन्दे, गुरूदेव का प्यार है

सागर से भी गहरा बन्दे, गुरूदेव का प्यार है

देख लगाकर गोता इसमें, तेरा बेड़ा पार है।


भव सागर में एक दिन तेरी जीवन नैया डूबेगी 

खेते खेते एक दिन तो पतवार भी तेरी छूटेगी।

जायेगा उस पार तू कैसे, चारों ओर अन्धकार है || 1 ||

सागर से भी गहरा बन्दे, गुरूदेव का प्यार है


संत समागम हरिकथा सब गुरू की कृपा से पाओगे

खुद आएगा गोविंदा घर गुरू का आशीश पाने को

बन्दे बिन गुरू कृपा के तेरी जिन्दगी बेकार है || 2 || 

सागर से भी गहरा बन्दे, गुरूदेव का प्यार है


सौंप दे नैया गुरूदेव को, वो ही पार लगा देंगें

पैर पकड़ ले जाकर के तू, सोए भाग्य जगा देंगें

पापी से भी पापी को भी करते ना इन्कार है || 3 ||

सागर से भी गहरा बन्दे, गुरूदेव का प्यार है





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