अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो, के दर पे सुदामा गरीब आ गया है
भटकते भटकते ना जाने कहाँ से तुम्हारे महल के करीब आ गया है
ना सिर पे हे पगड़ी, ना तन पे हे जामा, बतादो कन्हैया को नाम हे सुदामा
एक बार मोहन से जाकर के कह दो, के मिलने सखा बदनसीब आ गया है
अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो
सुनते ही दौड़े चले आये मोहन, लगाया गले से सुदामा को मोहन
हुआ रुकमणी को बहुत अचम्भा, ये मेहमान कैसा अजीब आ गया है
अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो
बराबर में अपने सुदामा बैठाये, चरण आंसुओं से श्याम ने धुलाये
ना घबराओं प्यारे जरा तुम सुदामा, ख़ुशी का समां तेरे करीब आ गया है
अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो
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