हम बुलबुले हैं इसकी, वो गुलसितां हमारा
वो संतरी हमारा, वो पासवां हमारा, सारे…
गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा,
मेरा कर्मा तू, मेरा धर्मा तू, तेरा सब कुछ मै, मेरा सब कुछ तू
हम्म आ आ...
हर करम अपना करेंगे, ऐ वतन तेरे लिएअच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।।। दोहा ।।
सांवरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
१. चंदा में ढूंढा तुम्हें, सूरज में पाया है
तारों की झिलमिल में मेरे श्याम का ठिकाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
२. ग्वालों में ढूंढा तुम्हें, गोपियों में पाया है
राधाजी के हृदय में, मेरे श्याम का ठिकाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
३. गंगा में ढूंढा तुम्हें, यमुना में पाया है
त्रिवेणी के संगम में मेरे श्याम का ठिकाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
४. मथुरा में ढूंढा तुम्हें, गोकुल में पाया है
वृंदावन की गलियों में मेरे श्याम का ठिकाना है|
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
५. महलों में ढूंढा तुझे, मन्दिरों में पाया है
भक्तों के हृदय में मेरे श्याम का ठिकाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
६. रामायण में ढूंढा तुझे भागवत में पाया है,
गीता जी के श्लोकों में मेरे श्याम का ठिकाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
राम से बड़ा राम का नाम, अंत में वो ही आये काम
राम से बड़ा राम का नाम
वो पापी तो डूब मरेगा जिसके मुख नहीं राम,
हो बन्दे, जिसके मुख नहीं राम
वो पत्थर तो तीर जायेगा जिसपे लिखा हो राम
राम से बड़ा राम का नाम
साधु सुमिरे संन्यासी सुमिरे, सुमिरत है घनश्याम
हो बन्दे, सुमिरत है घनश्याम
राम नाम को रटते रटते हो जाए सुबह -शाम
राम से बड़ा राम का नाम
सुमिरन से सब दुःख कट जाते, कोढ़ी लगे ना दाग
हो बन्दे, कोढ़ी लगे ना दाग
द्रौपदी ने ऐसा सुमिरा तुरत बनाए काम
राम से बड़ा राम का नाम
ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल कुरबान
तू ही मेरी आरज़ू, तू ही आबरू, तू ही मेरी जान
तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस जुबाँ को जिसपे आए तेरा नाम
सबसे प्यारी सुबह तेरी सबसे रंगी तेरी शाम
तुझपे दिल कुरबान, तू ही मेरी आरज़ू
माँ का दिल बनके कभी सीने से लग जाता है तू
और कभी नन्हीं सी बेटी बनके याद आता है तू
जितना याद आता है मुझको उतना तड़पता है तू
तुझपे दिल कुरबान, तू ही मेरी आरज़ू
छोड़कर तेरी जमीं को दूर आ पहुँचें है हम
फिर भी है ये ही तमन्ना तेरे जर्रों की कसम
हम जँहा पैदा हुए है, उस जगह ही निकले दम
तुझपे दिल कुरबान, तू ही मेरी आरज़ू
हे आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,
हे शीश वो जो प्रभु चरण में वंदन किया करे
सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
तो सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए
थाली भरने लाई रे खीचड़ो, ऊपर घी की बाटकी
जीमो मारा श्याम धणी, जीमावै बेटी जाट की
साँवरे से मिलने का सत्संग ही बहाना है
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है
मैं हूँ शरण में तेरी, संसार के रचैया
कश्ती मेरी लगा दो, उस पार ओ कन्हैया
अरे द्वारपालों, कन्हैया से कह दो, के दर पे सुदामा गरीब आ गया है
भटकते भटकते ना जाने कहाँ से तुम्हारे महल के करीब आ गया है
देदी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल
मात पिता गुरु प्रभु चरणों में प्रणवत बारम्बार
हम पर किया बड़ा उपकार, हम पर किया बड़ा उपकार
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा
ज्योत से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहते चलो
राह में आए जो दीन दुःखी, सबको गले से लगाते चलो
माँके आया आज पावणिया राज, मनडो राजी होग्यो
मनडो राजी होग्यो, मैं स्वागत रो सुख भोग्यो
हम भूल गए रे संसार, मगर ये परिवार नहीं भूले
रहे हम जिनके साथ, क्या दिन और क्या रात