सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
तो सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए
सुनता हूँ तेरी रहमत, दिन रात बरसती है
एक बूँद जो मिल जाए, मन की कली खिल जाए
सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
यह मन बड़ा चंचल है, कैसे इसे समझाऊ, कैसे तेरे गुण गाऊ
जितना इसे समझाऊ, उतना ही मचल जाए
सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
नजरों से गिरना ना, चाहे जितनी सज़ा देना
नजरों से जो गिर जाए, मुश्किल ही संभल पाए
सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
सद्गुरु तेरे चरणों में, बस एक तमन्ना है
तुम सामने हो मेरे, मेरा दम ही निकल जाए
सद्गुरु तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
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