ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन

हे आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,

हे शीश वो जो प्रभु चरण में वंदन किया करे

बेकार वो मुख है जो रहे व्यर्थ बातों में

मुख है वो जो हरी नाम का सुमिरन किया करे 

हीरे मोती से शोभा नहीं हे हाथों की,

हे हाथ वो जो भगवान का पूजन किया करे 

मरकर भी अमर नाम उस जीव का जग में 

प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे 


ऐसी लगी लगन मीरा हो गयी मगन 

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी

महलों में पली बनके जोगन चली 

मीरा रानी दीवानी कहाने लगी, ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन

 

१. कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं

मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी

बैठी संतों के संग रंग मोहन के रंग

मीरा प्रेमी प्रीतम को मानाने लगी 

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी, ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन


२. राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया 

मीरा सागर में सरिता सामने लगी

दुःख लाखों सहे मुख से गोविन्द कहे

मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी, ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन          

        

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें