प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए,
प्रेमियों ने जो बनाया बन गए प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

जान मीरा की ना राणा ले सका, 
सांप भेजे थे मुरारी बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

महाभारत के युद्ध में अर्जुन के लिए, 
थाम कर रासी सारथी बन गए
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए
 
ख्वाब तुलसीदास का पूरा हुआ, 
छोड़कर मुरली धनुरधर बन गए 
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

कौरव दल के सामने द्रौपदी के लिए, 
काढ़ कर घूंघट वो दासी बन गए 
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए

भात नरसीदास का तुमने भरा, 
वृंदावन के सेठ साँवरिया बन गए  
प्रेम के बंधन में मोहन बंध गए   


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