श्रीरामचरितमानस में भगवत्प्राप्ति के मुख्य पाँच साधन
- भगवन्नाम जप,
- भगवत्कथा श्रवण,
- गायन भगवत्स्वरूप का ध्यान,
- भगवान के स्वभाव का परिज्ञान,
- भगवत्कृपा
का अवलम्बन
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥
कैलास का वह स्वामी, नित इसका जाप करे। दे मन्त्र यही सबको, काशी में मुक्त करे ।हरे राम ॥
वह पवन पूत प्यारा, दिन रात यही सुमिरे। पा पावन प्यारा इसी से राधव को वश में करे |हरे ॥
प्रहलाद का यह जीवन, जपि विधन अनेक टरे। जल सम भई आग भगत हित, प्रभु नरसिंह रूप धरे ॥
ध्रुव ने भी यही भजकर, श्री हरि के दर्श करे। पा धाम अचल अनुपम, सुख के भण्डार भरे ॥ हरे॥
जप करके नाम यही, हैं लाखों पतित टरे। जो अधम नीच पाँवर पावन यह उन्हें करे || हरे ||
इस नाम की सुन गरजन, यमराज के दूत डरे । देखो न अजामिल के सब भय इसने दूर करे |हरे ॥
मां बाप यह भूखों का, प्यासों की प्यास हरे। अंधों की आँख यही पंगू के काम करे | हरे ||
मीरा का यही मोहन, अधरों पर वेणु धरे । तुलसी का यही राघव, कर में शर चाप फिरे ॥ हरे॥
भगवान यह भक्तों का, सब सार सँभार करें। बनकर मांझी नौका भवसागर पार करे | हरे राम ||
हे भाग अभागों का पूरण सब काम करे। निरधन का धन है यही दुख दारिद दूर करे | हरे ||
प्रेमिन का प्राण यही, नित प्रेम प्रदान करे। यह दास दुखी दीनों का, नित ही प्रतिपाल करे ॥
हरे राम हरे हरे राम राम राम हरे हरे | हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें