हम भूल गए रे संसार

हम भूल गए रे संसार, मगर ये परिवार नहीं भूले

रहे हम जिनके साथ, क्या दिन और क्या रात 

हम भूल गए रे उनकी घात, मगर व्यवहार नहीं भूले 


वे गुरुवर, जिन्होंने हमें पढ़ाया, मिट्टी को सोना बनाया 

उनकी भूल गए रे हम मार, मगर उपकार नहीं भूले 

हम भूल गए रे संसार


वो तरह तरह की नसीहतें, वो भांति भांति की शिक्षाएँ 

हम भूल गए रे धिक्कार, मगर उच्च विचार नहीं भूले 

हम भूल गए रे संसार


हमने की होगी गलतियाँ हज़ार, एक नहीं सौ सौ बार 

हम रूठ गए हर बार, मगर वो दुलार नहीं भूले

हम भूल गए रे संसार


          

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