जय जय जय हे वीणापाणि
शिव कल्याणी, मात भवानी
सप्त सुरों की तू महारानी
वेदों ने भी महिमा बखानी
आज सुरों के दीप जलाये
रोम रोम संगीत जगाये
बोलत घुंघरूं बाजे पायलियाँ
झूम रही है सारी नगरीयां
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