भीगी हुई पलके, आँसू ना छलके
कैसे दबाये दिल के दर्द को, भीगी हुई पलके
आता है दुनिया मई जो जाता सभी है
मिलना बिछड़ना सबकी रीत यही है
प्रीत निभाए, रीत निभाए, कैसे दबायें दिल के दर्द को
भीगी हुई पलकें
जाना है तो जाओ फिर भी दिल ना लगेगा
जुदाई का गम ये सारा दिल ना सहेगा
याद जब आएगी, हमको रुलाएगी, कैसे दबायें दिल के दर्द को
भीगी हुई पलकें
दिल से जुदा यूँ हमको करके ना जाना
अपने कामों में हमको भूल ना जाना
मन की गहराइयाँ, कहीं सूख ना जाइयां, कैसे दबायें दिल के दर्द को
भीगी हुई पलकें
गुरू और शिष्य जैसा नाता हमारा
हमको यहाँ अब, छोड़ ना जाना
जाना जरुरी है, यही मज़बूरी है, कैसे दबायें दिल के दर्द को
भीगी हुई पलकें
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